*मुक्त-मुक्तक : 59 - तेरे तेवर से.................


तेरे तेवर से 
बग़ावत की तेज़ बू आए ॥ 
मंद साँसों से भी 
नाराज़गी की लू आए ॥ 
कैसे मुमकिन है 
और साथ-साथ अपना सफ़र ,
न चले साथ 
न आगे न पीछे तू आए ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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