55 : मुक्त-ग़ज़ल - चाहें तो मुझसे..................


चाहें तो मुझसे प्यार मोहब्बत न कीजिये ॥
इतना तो कीजिये कि यूँ नफ़रत न कीजिये ॥
मुझसे निभा रहे हो किस जनम की दुश्मनी ,
यूँ बार बार दिल मेरा आहत न कीजिये ॥
ख़िदमत में मेरी जान भी हाज़िर है आपकी ,
दीन-ओ-ईमान की मेरे चाहत न कीजिये ॥
जाऊंगा तो मुड़कर भी न देखूंगा फ़िर इधर ,
घर पे बुला के ऐसे बेइज़्ज़त न कीजिये ॥
जी चाहे जितने उतने क़हर ढाइए मुझ पर ,
खुद्दार हूँ अहसान की जुरअत न कीजिये ॥
बस इतनी मेहरबानी मुझपे कीजिये जनाब ,
इतनी सी भी मेरे लिए ज़हमत न कीजिये ॥
माना की बहुत बाल हैं पर रीछ ज़ात हूँ ,
भेड़ों की जगह मेरी हज़ामत न कीजिये ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Pratibha Verma said…
बहुत सुन्दर प्रस्तुति बधाई ...
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !
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