52 : मुक्त-ग़ज़ल - मैं तमन्नाई हूँ...................





मैं तमन्नाई हूँ कि मुझको लोरियाँ मिलतीं ॥ 
नींद न आए नींद वाली गोलियाँ मिलतीं ॥ 
जिसको देखो वो तुर्श होके बात करता है ,
क्यों नहीं कोयलों सी सबमें बोलियाँ मिलतीं ॥ 
सिर्फ़ चाहत है लाल-लाल बेरियों की मगर ,
मुझको कच्ची हरी-हरी निबोलियाँ मिलतीं ॥ 
लोग पिल्लों को पालते हैं मोहब्बत से बड़ी ,
क़ाश लवारिसों को ऐसी गोदियाँ मिलतीं ॥ 
इश्क़ के वास्ते तैयार हो भी जाएँ मगर ,
ब्याह बेकार से करने न गोरियाँ मिलतीं ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Pratibha Verma said…
लोग पिल्लों को पालते हैं मोहब्बत से बड़ी ,
क़ाश लवारिसों को ऐसी गोदियाँ मिलतीं ॥ ...

क्या बात है ...
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !
Anonymous said…
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