*मुक्त-मुक्तक : 50 - ऐसा लगता था वो.........


ऐसा लगता था वो हमको 
घास रहे हैं डाल ॥
हँस-हँस कर करते थे ऐसा 
मेरा इस्तक़बाल ॥
बेसब्री में ईलू - ईलू 
मुँह से निकल गया ,
उसने ऐसा चाँटा मारा 
लाल कर दिया गाल ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Shyam Snehi said…
हाथ वीणा आसन कमल है,
ज्ञानपूरित है मुखमंडल तेरा
विचरण में तुम हंसवाहिनी,
अब ज्ञानहंस सा प्यार दे।
हे विद्या की देवी मां शारदे।।
अब ज्ञानहंस सा प्यार दे। धन्यवाद ! Shyam Snehi जी !

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