46 : मुक्त-ग़ज़ल - जो आ ही जाये.................

जो आ ही जाये लबों पर तो मुस्कुरा देना ॥ 
कि सुनके तेरा फ़साना किसी को क्या लेना ॥ 
न करना इल्तिजा क़ाबिल न हो जिसके उसकी ,
मिले भी तो न ज़रूरत से कुछ सिवा लेना ॥ 
बुरा है यूँ भी किसी से उधारियाँ करना ,
कभी  दोस्त से तो भूल के क़र्ज़ा लेना ॥ 
मिले न मुफ़्त में दुनिया  की कोई शै लेकिन ,
मिले जहाँ न बूँद प्यार की चुरा लेना ॥ 
पड़े मिलें जो ख़ज़ाने  तू चल दे ठुकराकर ,
गिरा मिले कोई इंसाँ तो झट उठा लेना ॥ 
जो प्यार करता है तुझको किसी ग़रज़ के बग़ैर ,
तू जान दे के भी मत उसकी बददुआ लेना ॥  
 करना चाहे उम्र भर किसी को तू सज़्दा ,
शहीदे मुल्क की तुर्बत  पे सर झुका लेना ॥ 
बुरा कोई भी करे काम तो इतना करना ,
लगाना दर न भले पर्दा तो गिरा लेना ॥
( सिवा=से अधिक , तुर्बत=क़ब्र )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

yashoda agrawal said…
आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 20/02/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!
धन्यवाद ! yashoda agrawal जी !
expression said…
अच्छी रचना....

अनु
Pratibha Verma said…
बहुत खूब....
धन्यवाद !Pratibha Verma जी !
धन्यवाद !dineshpareek जी !
धन्यवाद ! (expression) अनु जी !
बहुत बहुत धन्यवाद ! gope mishra जी !
shishirkumar said…
Bahut dilkash hai Dr sahub Aapki yah gazal.



Shishirkumar.
धन्यवाद ! shishirkumar जी !

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