14. मुक्त-ग़ज़ल : यों ऊँची मीनार कि ज्यों...............



यों ऊँची मीनार कि ज्यों एफिल टावर लाओ II 
सब ठिगने सब  बौने  कोई कद्दावर लाओ II
अदरख का मत स्वाद पता करने बन्दर रखना ,
पत्थर  में  हीरे की परख को दीदावर  लाओ II
 दुश्मन की गर्दन को कुतरने मत चक्कू-वक्कू ,
फरसे औ' तलवार को पैना करवाकर लाओ II
कुछ चीज़ों को ख़ाक कि सोना हर क़ीमत ले लो ,
कुछ सामाँ हर हाल हमेशा ठहराकर लाओ II
इतने शर्मीले जो करते गुसल पहन के सूट ,
उनको बेहोशी में भी मत नंगाकर लाओ II
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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