*मुक्त-मुक्तक : 16 -मेरे भी अँधेरों को......................


मेरे भी अँधेरों को 
इक आफ़ताब देना ॥

इक ,जिंदगी बदल दे ,
ऐसी किताब देना ॥

हरगिज़ तलब न शरबत-
ओ-शराब की है मुझको ,

मेरी तिश्नगी की खातिर 
मक्के का आब देना ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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