*मुक्त-मुक्तक : 12 - आँख सैलाब इक................



आँख सैलाब इक भरा सा है ॥
यों वो गुर्राये पर डरा सा है ॥
सिर्फ़ लगता है मस्त औ ज़िंदा ,
लेकिन अंदर मरा मरा सा है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


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