*मुक्त-मुक्तक : 6 - कि जैसे आपको नीर.....


कि जैसे आपको नीर अपने घर का
 क्षीर लगता है ॥
ज़रा सा पिन किसी सुल्तान की
 शमशीर लगता है ॥
तो फिर मैं क्या ग़लत कहता हूँ 
जो अपना शहर मुझको ,
भयंकर गर्मियों में 

वादी – ए – कश्मीर लगता है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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