*मुक्त-मुक्तक : 15 - तमगे तो हमें.................


तमगे तो हमे 
एक नहीं चार मिले हैं ॥
इक बार नहीं 
चार चार बार मिले हैं ॥
चुन चुन के 
ऊँची-ऊँची डिग्रियों के वास्ते ,
अब तक मगर 
न कोई रोज़गार मिले हैं ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति


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