16. मुक्त-ग़ज़ल : मुझको हैरत है.....................



मुझको हैरत है यह हुआ कैसे ?
लोमड़ी  हो  गई  गधा  कैसे ?
इंसां इंसां नहीं रहा बाक़ी ,
उसको तुम कह गए ख़ुदा कैसे ?

जो न चपरास के भी क़ाबिल था ,
आला अफ़सर वो फ़िर बना कैसे ?

लोग उस रोग से सब ही तो मरें ,
वो मरा  साफ़ बच गया कैसे ?

जो अकड़ता था ख़ुदा के आगे ,
आगे बन्दे के वो झुका कैसे ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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