*मुक्त-मुक्तक : 4 - दुनिया का अनोखा ही..................


दुनिया का अनोखा ही 
कारोबार हो रहा ॥ 
अब भीख मांगना भी 
रोजगार हो रहा ॥ 
पेशा ये मुनाफे का 
इस कदर हुआ है अब ,
इसमें पढे-लिखों का भी
 शुमार हो रहा ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति




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