*मुक्त-मुक्तक : 2 - जिसका रब चाहता है.......


जिसका रब चाहता है धड़ का बना देना सर ॥
वो अतल से भी उबर आता है चलकर ऊपर ॥
गर न मर्ज़ी हो ख़ुदा की तो पंख रखकर भी ,
तैर पाएँ न मीन खग न उड़ सकें फर-फर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति



Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

सिर काटेंगे