*मुक्त-मुक्तक : 1 - हँस हँस के करे माफ़...............


हँस-हँस के करे माफ 
न रो-रो के सज़ा दे ॥
अब ग़म-ए-हिज़्र मुझको तो
 मिलने का मज़ा दे ॥ 
कल चाहता था रब से
 ज़िंदगी की रिहाई ,
अब चाहता हूँ मुझको
 कभी भी न क़ज़ा दे ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


















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