7. मुक्त-ग़ज़ल : सब तो सामान हैं..................


सब तो सामान हैं पिताजी के II
कितने एहसान हैं पिताजी के II
हमपे टी-शर्ट शानदार मगर ,
छन्ने बनियान हैं पिताजी के II
चाहते  हैं जो वो बनूँ कैसे,
खूब अरमान हैं पिताजी के II
चुप्पियाँ भी हमारी सुन लेते
दिल में दो कान हैं पिताजी के II
मर्मबेधी अचूक नुस्खों में ,
मौन के बान हैं पिताजी के II
गाय को रोटी,चींटी को आटा,
ऐसे कुछ दान हैं पिताजी के II 
विष्णु ,ब्रह्मा, महेश देव नहीं !
तीन भगवान हैं पिताजी के II
-डॉ.हीरालाल प्रजापति 

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