*मुक्त-मुक्तक : 8 - सर्दियों में ज्यों...............


सर्दियों में ज्यों सुलगती 
लकड़ियाँ अच्छी लगें ॥
जैसे हँसती खिलखिलाती 
लड़कियाँ अच्छी लगें ॥
मुझको मौसम कोई हो 
जलता-जमाता-भीगता ,
बंद कमरे की खुली सब
 खिड़कियाँ अच्छी लगें ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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