21. मुक्त-ग़ज़ल : मुरझा चुका जो फ़ूल.................


मुरझा चुका जो फूल दोबारा खिलेगा क्या ?
जो भस्म हो चुका वो कोयला जलेगा क्या ?
 है जिसके पास खुद ही सख्त तंगी ओ कमी ,
इनकार के सिवाय मांगकर मिलेगा क्या ?
 हाथी भी जहाँ छोड़ते हों अपने पसीने ,
चीटों  के ठेलने से वाँ पर्वत हिलेगा क्या ?
 तलवार से भी जिसकी खाल उधड़ नहीं सकी ,
नाखून से उस आदमी का मुँह छिलेगा क्या ?
 जिसने ज़मीन पर न कभी पाँव रखे हों ,
काँटों पे अंगारों पे वो पैदल चलेगा क्या ?
 आते ही जिसके गुंचे लोग नोच के रख दें ,
बेशक वो पेड़ बाँझ नहीं पर फलेगा क्या ?
 औलाद का जो पेट न भर पायें ठीक से ,
तोहफे में उनको कुत्ते का पिल्ला जमेगा क्या II
 -डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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